वक़्त की उस लय पर चल रहीं हूँ, जहाँ खुद की परछाई से डर लगता हैं
आगे बढ तो रहीं हूँ पर, पीछे देखने पर डर लगता हैं
आसमान की उचाईयों से गिरने के दर्द से ज्यादा
आज मुझे उस खूबसूरत ख़ुशी से डर लगता हैं
कहते हैं की हर चीज़ का वक़्त होता हैं, जिसकी किस्मत में हो वही मिलता हैं
आज वही वक़्त और अपनी किस्मत से डर लगता हैं
लय पर तो चल रही हूँ, पर अपनी चाल पर डर लगता हैं.........
0 comments:
Post a Comment